लाल किताब में दूसरा भाव: धर्म स्थान
परिवार, बचत, वाणी, भोजन और ससुराल। पक्का स्वामी: गुरु।
लाल किताब में दूसरा घर परिवार का मंदिर है: बचत, थाली का भोजन, घर में बोले गए शब्द और ससुराल। इसका स्वामी गुरु है, और किताब इसे पूजा-स्थल की तरह पढ़ती है, इसलिए दूसरे घर के कई उपायों में पूजा-स्थल के सम्मान की बात आती है।
दूसरे घर का ग्रह बताता है कि परिवार किस पर चलता है और कैसे बोलता है। लाल किताब अक्सर दूसरे घर को नौवें और दसवें का नतीजा मानती है: भाग्य और कर्म जो कमाते हैं, वह यहां जमा होता है।
दूसरे भाव में हर ग्रह
आपके दूसरे भाव में क्या है?
हर व्यक्ति का दूसरा भाव अलग ग्रहों से भरा होता है, और कभी-कभी ख़ाली भी। मुफ़्त कुंडली में देखें कि आपके दूसरे भाव में कौन है, और लाल किताब उसके बारे में क्या कहती है।
अपना दूसरा भाव देखें →अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लाल किताब में दूसरा भाव क्या दर्शाता है?
दूसरा भाव, धर्म स्थान, परिवार, बचत, वाणी, भोजन और ससुराल का घर है। इसका पक्का स्वामी गुरु है।
दूसरे भाव में कौन-सा ग्रह अच्छा है?
लाल किताब के अनुसार सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र यहां ज़्यादातर शुभ माने जाते हैं। पर फल पूरी कुंडली पर निर्भर करता है।
ये पारंपरिक लाल किताब पद्धतियां हैं, हमारे शब्दों में। ये चिकित्सा, कानूनी या आर्थिक सलाह की जगह नहीं लेतीं। हम कभी रत्न, महंगे अनुष्ठान या डराने वाली भविष्यवाणियां नहीं सुझाते। कुंडली की गणना कैसे होती है