अमृतसर पंचांग
मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 · Punjab
अमावस्या
पंचांग के पाँच अंग
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 05:31 PM तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 04:58 PM (अगले दिन) तक
- वार
- मंगलवार
- नक्षत्र
- धनिष्ठा 09:16 PM तक, फिर शतभिषा 09:16 PM (अगले दिन) तक
- योग
- परिघ 12:28 AM (अगले दिन) तक, फिर शिव 10:45 PM (अगले दिन) तक
- करण
- नाग 05:31 PM तक, फिर किंस्तुघ्न 05:18 AM (अगले दिन) तक, फिर बव 04:58 PM (अगले दिन) तक
सूर्य और चंद्र
- सूर्योदय
- 07:10 AM
- सूर्यास्त
- 06:18 PM
- चंद्रोदय
- 07:04 AM
- चंद्रास्त
- 06:15 PM
- चंद्र राशि
- मकर 09:05 AM तक, फिर कुंभ 03:00 PM (अगले दिन) तक
- सूर्य राशि
- कुंभ
शुभ-अशुभ समय
- राहु काल
- 03:31 PM – 04:55 PM
- यमगण्ड
- 09:57 AM – 11:21 AM
- गुलिक काल
- 12:44 PM – 02:08 PM
- अभिजित मुहूर्त
- 12:22 PM – 01:06 PM
मास और संवत
- पक्ष
- कृष्ण पक्ष
- मास (अमांत)
- माघ
- मास (पूर्णिमांत)
- फाल्गुन
- विक्रम संवत
- 2082
- शक संवत
- 1947
आपकी कुंडली के लिए आज
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पंचांग क्या है
पंचांग के पाँच अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के 12 अंश के अंतर से बनती है, इसलिए एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं। नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति से, और योग सूर्य-चंद्र के जोड़ से निकलता है।
पंचांग सूर्योदय पर आधारित है, इसलिए हर शहर का पंचांग थोड़ा अलग होता है: तिथि का अंत एक ही क्षण पर होता है, पर सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के अनुसार बदलते हैं।
यहाँ हर मान स्विस एफेमेरिस और लाहिरी अयनांश से गणना किया गया है, अनुमान से नहीं।
आज अमृतसर में कौन सी तिथि है?
मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 को अमृतसर में: कृष्ण अमावस्या 05:31 PM तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 04:58 PM (अगले दिन) तक।
आज अमृतसर में राहु काल कब है?
मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026 को अमृतसर में राहु काल 03:31 PM – 04:55 PM है। राहु काल दिन के आठ भागों में से एक है; परंपरा में इसमें नया काम शुरू नहीं किया जाता।
आज का नक्षत्र कौन सा है?
धनिष्ठा 09:16 PM तक, फिर शतभिषा 09:16 PM (अगले दिन) तक।
आज अमृतसर में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय 07:10 AM, सूर्यास्त 06:18 PM।
क्या हर शहर का पंचांग एक जैसा होता है?
नहीं। तिथि और नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर बदलते हैं, पर सूर्योदय, राहु काल और शुभ मुहूर्त शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर हैं।
दूसरे शहरों का पंचांग
समय अमृतसर के स्थानीय समय में। सूर्योदय सूर्य के ऊपरी किनारे से, अपवर्तन सहित; तिथि और करण चंद्र-सूर्य के अंतर से; नक्षत्र और योग लाहिरी अयनांश से। स्थानीय परंपरा के अनुसार व्रत-त्योहार एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं। गणना कैसे होती है