पंचांग

जयपुर पंचांग

गुरुवार, 27 मई 2027 · Rajasthan

पंचांग के पाँच अंग

तिथि
कृष्ण सप्तमी 06:26 AM (अगले दिन) तक
वार
गुरुवार
नक्षत्र
धनिष्ठा 07:14 AM (अगले दिन) तक
योग
इन्द्र 02:58 AM (अगले दिन) तक, फिर वैधृति 03:34 AM (अगले दिन) तक
करण
विष्टि (भद्रा) 05:18 PM तक, फिर बव 06:26 AM (अगले दिन) तक

सूर्य और चंद्र

सूर्योदय
05:34 AM
सूर्यास्त
07:14 PM
चंद्रोदय
आज नहीं
चंद्रास्त
11:12 AM
चंद्र राशि
मकर 05:49 PM तक, फिर कुंभ 05:09 AM (अगले दिन) तक
सूर्य राशि
वृषभ

शुभ-अशुभ समय

राहु काल
02:06 PM – 03:49 PM
यमगण्ड
05:34 AM – 07:16 AM
गुलिक काल
08:59 AM – 10:41 AM
अभिजित मुहूर्त
11:56 AM – 12:51 PM

मास और संवत

पक्ष
कृष्ण पक्ष
मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949

आपकी कुंडली के लिए आज

पंचांग सबके लिए एक है; आपकी कुंडली पर इसका असर आपकी चंद्र राशि और दशा पर निर्भर है। आज का राशिफल · मुफ़्त कुंडली बनाएँ

जयपुर में इस हफ़्ते का राहु काल · जयपुर का चौघड़िया

पंचांग क्या है

पंचांग के पाँच अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के 12 अंश के अंतर से बनती है, इसलिए एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं। नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति से, और योग सूर्य-चंद्र के जोड़ से निकलता है।

पंचांग सूर्योदय पर आधारित है, इसलिए हर शहर का पंचांग थोड़ा अलग होता है: तिथि का अंत एक ही क्षण पर होता है, पर सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के अनुसार बदलते हैं।

यहाँ हर मान स्विस एफेमेरिस और लाहिरी अयनांश से गणना किया गया है, अनुमान से नहीं।

आज जयपुर में कौन सी तिथि है?

गुरुवार, 27 मई 2027 को जयपुर में: कृष्ण सप्तमी 06:26 AM (अगले दिन) तक।

आज जयपुर में राहु काल कब है?

गुरुवार, 27 मई 2027 को जयपुर में राहु काल 02:06 PM – 03:49 PM है। राहु काल दिन के आठ भागों में से एक है; परंपरा में इसमें नया काम शुरू नहीं किया जाता।

आज का नक्षत्र कौन सा है?

धनिष्ठा 07:14 AM (अगले दिन) तक।

आज जयपुर में सूर्योदय कब है?

सूर्योदय 05:34 AM, सूर्यास्त 07:14 PM।

क्या हर शहर का पंचांग एक जैसा होता है?

नहीं। तिथि और नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर बदलते हैं, पर सूर्योदय, राहु काल और शुभ मुहूर्त शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर हैं।

दूसरे शहरों का पंचांग

समय जयपुर के स्थानीय समय में। सूर्योदय सूर्य के ऊपरी किनारे से, अपवर्तन सहित; तिथि और करण चंद्र-सूर्य के अंतर से; नक्षत्र और योग लाहिरी अयनांश से। स्थानीय परंपरा के अनुसार व्रत-त्योहार एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं। गणना कैसे होती है