कोलकाता पंचांग
शुक्रवार, 7 मई 2027 · West Bengal
पंचांग के पाँच अंग
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 02:14 PM तक, फिर शुक्ल द्वितीया 11:43 AM (अगले दिन) तक
- वार
- शुक्रवार
- नक्षत्र
- कृत्तिका 11:42 PM तक, फिर रोहिणी 09:53 PM (अगले दिन) तक
- योग
- सौभाग्य 08:57 AM तक, फिर शोभन 05:51 AM (अगले दिन) तक
- करण
- बव 02:14 PM तक, फिर बालव 01:00 AM (अगले दिन) तक, फिर कौलव 11:43 AM (अगले दिन) तक
सूर्य और चंद्र
- सूर्योदय
- 05:00 AM
- सूर्यास्त
- 06:06 PM
- चंद्रोदय
- 05:15 AM
- चंद्रास्त
- 07:13 PM
- चंद्र राशि
- मेष 06:55 AM तक, फिर वृषभ 08:56 AM (अगले दिन) तक
- सूर्य राशि
- मेष
शुभ-अशुभ समय
- राहु काल
- 09:55 AM – 11:33 AM
- यमगण्ड
- 02:49 PM – 04:27 PM
- गुलिक काल
- 06:38 AM – 08:16 AM
- अभिजित मुहूर्त
- 11:07 AM – 11:59 AM
मास और संवत
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- मास (अमांत)
- वैशाख
- मास (पूर्णिमांत)
- वैशाख
- विक्रम संवत
- 2084
- शक संवत
- 1949
आपकी कुंडली के लिए आज
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पंचांग क्या है
पंचांग के पाँच अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के 12 अंश के अंतर से बनती है, इसलिए एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं। नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति से, और योग सूर्य-चंद्र के जोड़ से निकलता है।
पंचांग सूर्योदय पर आधारित है, इसलिए हर शहर का पंचांग थोड़ा अलग होता है: तिथि का अंत एक ही क्षण पर होता है, पर सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के अनुसार बदलते हैं।
यहाँ हर मान स्विस एफेमेरिस और लाहिरी अयनांश से गणना किया गया है, अनुमान से नहीं।
आज कोलकाता में कौन सी तिथि है?
शुक्रवार, 7 मई 2027 को कोलकाता में: शुक्ल प्रतिपदा 02:14 PM तक, फिर शुक्ल द्वितीया 11:43 AM (अगले दिन) तक।
आज कोलकाता में राहु काल कब है?
शुक्रवार, 7 मई 2027 को कोलकाता में राहु काल 09:55 AM – 11:33 AM है। राहु काल दिन के आठ भागों में से एक है; परंपरा में इसमें नया काम शुरू नहीं किया जाता।
आज का नक्षत्र कौन सा है?
कृत्तिका 11:42 PM तक, फिर रोहिणी 09:53 PM (अगले दिन) तक।
आज कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय 05:00 AM, सूर्यास्त 06:06 PM।
क्या हर शहर का पंचांग एक जैसा होता है?
नहीं। तिथि और नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर बदलते हैं, पर सूर्योदय, राहु काल और शुभ मुहूर्त शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर हैं।
दूसरे शहरों का पंचांग
समय कोलकाता के स्थानीय समय में। सूर्योदय सूर्य के ऊपरी किनारे से, अपवर्तन सहित; तिथि और करण चंद्र-सूर्य के अंतर से; नक्षत्र और योग लाहिरी अयनांश से। स्थानीय परंपरा के अनुसार व्रत-त्योहार एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं। गणना कैसे होती है