लंदन पंचांग
रविवार, 16 मई 2027 · United Kingdom
एकादशी (व्रत)
पंचांग के पाँच अंग
- तिथि
- शुक्ल एकादशी 12:43 PM तक, फिर शुक्ल द्वादशी 11:58 AM (अगले दिन) तक
- वार
- रविवार
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनी 07:05 AM तक, फिर हस्त 06:59 AM (अगले दिन) तक
- योग
- वज्र 10:12 PM तक, फिर सिद्धि 08:40 PM (अगले दिन) तक
- करण
- विष्टि (भद्रा) 12:43 PM तक, फिर बव 12:18 AM (अगले दिन) तक, फिर बालव 11:58 AM (अगले दिन) तक
सूर्य और चंद्र
- सूर्योदय
- 05:07 AM
- सूर्यास्त
- 08:47 PM
- चंद्रोदय
- 04:31 PM
- चंद्रास्त
- 03:06 AM
- चंद्र राशि
- कन्या 07:03 PM (अगले दिन) तक
- सूर्य राशि
- वृषभ
शुभ-अशुभ समय
- राहु काल
- 06:49 PM – 08:47 PM
- यमगण्ड
- 12:57 PM – 02:54 PM
- गुलिक काल
- 04:52 PM – 06:49 PM
- अभिजित मुहूर्त
- 12:26 PM – 01:28 PM
मास और संवत
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- मास (अमांत)
- वैशाख
- मास (पूर्णिमांत)
- वैशाख
- विक्रम संवत
- 2084
- शक संवत
- 1949
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पंचांग क्या है
पंचांग के पाँच अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के 12 अंश के अंतर से बनती है, इसलिए एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं। नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति से, और योग सूर्य-चंद्र के जोड़ से निकलता है।
पंचांग सूर्योदय पर आधारित है, इसलिए हर शहर का पंचांग थोड़ा अलग होता है: तिथि का अंत एक ही क्षण पर होता है, पर सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के अनुसार बदलते हैं।
यहाँ हर मान स्विस एफेमेरिस और लाहिरी अयनांश से गणना किया गया है, अनुमान से नहीं।
आज लंदन में कौन सी तिथि है?
रविवार, 16 मई 2027 को लंदन में: शुक्ल एकादशी 12:43 PM तक, फिर शुक्ल द्वादशी 11:58 AM (अगले दिन) तक।
आज लंदन में राहु काल कब है?
रविवार, 16 मई 2027 को लंदन में राहु काल 06:49 PM – 08:47 PM है। राहु काल दिन के आठ भागों में से एक है; परंपरा में इसमें नया काम शुरू नहीं किया जाता।
आज का नक्षत्र कौन सा है?
उत्तरा फाल्गुनी 07:05 AM तक, फिर हस्त 06:59 AM (अगले दिन) तक।
आज लंदन में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय 05:07 AM, सूर्यास्त 08:47 PM।
क्या हर शहर का पंचांग एक जैसा होता है?
नहीं। तिथि और नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर बदलते हैं, पर सूर्योदय, राहु काल और शुभ मुहूर्त शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर हैं।
दूसरे शहरों का पंचांग
समय लंदन के स्थानीय समय में। सूर्योदय सूर्य के ऊपरी किनारे से, अपवर्तन सहित; तिथि और करण चंद्र-सूर्य के अंतर से; नक्षत्र और योग लाहिरी अयनांश से। स्थानीय परंपरा के अनुसार व्रत-त्योहार एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं। गणना कैसे होती है