पंचांग

लंदन पंचांग

मंगलवार, 22 जून 2027 · United Kingdom

पंचांग के पाँच अंग

तिथि
कृष्ण तृतीया 08:37 AM तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 11:13 AM (अगले दिन) तक
वार
मंगलवार
नक्षत्र
श्रवण 06:47 AM (अगले दिन) तक
योग
वैधृति 05:32 AM (अगले दिन) तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:37 AM तक, फिर बव 09:55 PM तक, फिर बालव 11:13 AM (अगले दिन) तक

सूर्य और चंद्र

सूर्योदय
04:42 AM
सूर्यास्त
09:22 PM
चंद्रोदय
11:30 PM
चंद्रास्त
07:50 AM
चंद्र राशि
मकर 08:21 PM (अगले दिन) तक
सूर्य राशि
मिथुन

शुभ-अशुभ समय

राहु काल
05:12 PM – 07:17 PM
यमगण्ड
08:52 AM – 10:57 AM
गुलिक काल
01:02 PM – 03:07 PM
अभिजित मुहूर्त
12:29 PM – 01:35 PM

मास और संवत

पक्ष
कृष्ण पक्ष
मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949

आपकी कुंडली के लिए आज

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लंदन में इस हफ़्ते का राहु काल · लंदन का चौघड़िया

पंचांग क्या है

पंचांग के पाँच अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के 12 अंश के अंतर से बनती है, इसलिए एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं। नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति से, और योग सूर्य-चंद्र के जोड़ से निकलता है।

पंचांग सूर्योदय पर आधारित है, इसलिए हर शहर का पंचांग थोड़ा अलग होता है: तिथि का अंत एक ही क्षण पर होता है, पर सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के अनुसार बदलते हैं।

यहाँ हर मान स्विस एफेमेरिस और लाहिरी अयनांश से गणना किया गया है, अनुमान से नहीं।

आज लंदन में कौन सी तिथि है?

मंगलवार, 22 जून 2027 को लंदन में: कृष्ण तृतीया 08:37 AM तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 11:13 AM (अगले दिन) तक।

आज लंदन में राहु काल कब है?

मंगलवार, 22 जून 2027 को लंदन में राहु काल 05:12 PM – 07:17 PM है। राहु काल दिन के आठ भागों में से एक है; परंपरा में इसमें नया काम शुरू नहीं किया जाता।

आज का नक्षत्र कौन सा है?

श्रवण 06:47 AM (अगले दिन) तक।

आज लंदन में सूर्योदय कब है?

सूर्योदय 04:42 AM, सूर्यास्त 09:22 PM।

क्या हर शहर का पंचांग एक जैसा होता है?

नहीं। तिथि और नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर बदलते हैं, पर सूर्योदय, राहु काल और शुभ मुहूर्त शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर हैं।

दूसरे शहरों का पंचांग

समय लंदन के स्थानीय समय में। सूर्योदय सूर्य के ऊपरी किनारे से, अपवर्तन सहित; तिथि और करण चंद्र-सूर्य के अंतर से; नक्षत्र और योग लाहिरी अयनांश से। स्थानीय परंपरा के अनुसार व्रत-त्योहार एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं। गणना कैसे होती है