आज का चौघड़िया · रविवार, 1 नवंबर 2026

श्रीनगर का चौघड़िया

दिन का चौघड़िया

उद्वेग06:49 AM – 08:10 AMअशुभ
चर08:10 AM – 09:32 AMयात्रा
लाभ09:32 AM – 10:53 AMशुभ
अमृत10:53 AM – 12:14 PMशुभ
काल12:14 PM – 01:35 PMअशुभ
शुभ01:35 PM – 02:56 PMशुभ
रोग02:56 PM – 04:17 PMअशुभ
उद्वेग04:17 PM – 05:38 PMअशुभ

रात का चौघड़िया

शुभ05:38 PM – 07:17 PMशुभ
अमृत07:17 PM – 08:56 PMशुभ
चर08:56 PM – 10:35 PMयात्रा
रोग10:35 PM – 12:14 AM (अगले दिन)अशुभ
काल12:14 AM (अगले दिन) – 01:53 AM (अगले दिन)अशुभ
लाभ01:53 AM (अगले दिन) – 03:32 AM (अगले दिन)शुभ
उद्वेग03:32 AM (अगले दिन) – 05:11 AM (अगले दिन)अशुभ
शुभ05:11 AM (अगले दिन) – 06:50 AM (अगले दिन)शुभ

अगले 6 दिन: दिन के शुभ चौघड़िया

  • सोमवार, 2 नवंबर 2026: अमृत 06:50 AM – 08:11 AM, शुभ 09:32 AM – 10:53 AM, लाभ 02:55 PM – 04:16 PM, अमृत 04:16 PM – 05:37 PM
  • मंगलवार, 3 नवंबर 2026: लाभ 10:53 AM – 12:14 PM, अमृत 12:14 PM – 01:34 PM, शुभ 02:55 PM – 04:15 PM
  • बुधवार, 4 नवंबर 2026: लाभ 06:52 AM – 08:13 AM, अमृत 08:13 AM – 09:33 AM, शुभ 10:53 AM – 12:14 PM, लाभ 04:15 PM – 05:35 PM
  • गुरुवार, 5 नवंबर 2026: शुभ 06:53 AM – 08:13 AM, लाभ 12:14 PM – 01:34 PM, अमृत 01:34 PM – 02:54 PM, शुभ 04:14 PM – 05:34 PM
  • शुक्रवार, 6 नवंबर 2026: लाभ 08:14 AM – 09:34 AM, अमृत 09:34 AM – 10:54 AM, शुभ 12:14 PM – 01:34 PM
  • शनिवार, 7 नवंबर 2026: शुभ 08:15 AM – 09:34 AM, लाभ 01:33 PM – 02:53 PM, अमृत 02:53 PM – 04:13 PM

श्रीनगर का पूरा पंचांग · श्रीनगर में राहु काल

चौघड़िया क्या है

दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है, हर भाग लगभग डेढ़ घंटे का। हर भाग का एक नाम और स्वामी ग्रह है।

अमृत, शुभ और लाभ शुभ माने जाते हैं; चर यात्रा के लिए ठीक है; उद्वेग, काल और रोग में नया काम शुरू नहीं किया जाता। दिन का पहला चौघड़िया वार के स्वामी का होता है।

यहाँ के समय उस शहर के वास्तविक सूर्योदय और सूर्यास्त से गणना किए गए हैं।

आज श्रीनगर में शुभ चौघड़िया कब है?

रविवार, 1 नवंबर 2026 को दिन में: लाभ 09:32 AM – 10:53 AM; अमृत 10:53 AM – 12:14 PM; शुभ 01:35 PM – 02:56 PM।

कौन से चौघड़िया शुभ हैं?

अमृत, शुभ और लाभ शुभ हैं; चर यात्रा के लिए ठीक; उद्वेग, काल और रोग अशुभ माने जाते हैं।

चौघड़िया की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त के समय को 8 से भाग दें; हर भाग एक चौघड़िया है। रात के लिए सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक यही करें।

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