लखनऊ पंचांग
सोमवार, 26 जनवरी 2026 · Uttar Pradesh
पंचांग के पाँच अंग
- तिथि
- शुक्ल अष्टमी 09:18 PM तक, फिर शुक्ल नवमी 07:05 PM (अगले दिन) तक
- वार
- सोमवार
- नक्षत्र
- अश्विनी 12:33 PM तक, फिर भरणी 11:09 AM (अगले दिन) तक
- योग
- साध्य 09:11 AM तक, फिर शुभ 06:19 AM (अगले दिन) तक, फिर शुक्ल 03:13 AM (अगले दिन) तक
- करण
- विष्टि (भद्रा) 10:17 AM तक, फिर बव 09:18 PM तक, फिर बालव 08:14 AM (अगले दिन) तक
सूर्य और चंद्र
- सूर्योदय
- 06:53 AM
- सूर्यास्त
- 05:43 PM
- चंद्रोदय
- 11:18 AM
- चंद्रास्त
- 12:04 AM
- चंद्र राशि
- मेष 04:45 PM (अगले दिन) तक
- सूर्य राशि
- मकर
शुभ-अशुभ समय
- राहु काल
- 08:15 AM – 09:36 AM
- यमगण्ड
- 10:57 AM – 12:18 PM
- गुलिक काल
- 01:40 PM – 03:01 PM
- अभिजित मुहूर्त
- 11:57 AM – 12:40 PM
मास और संवत
- पक्ष
- शुक्ल पक्ष
- मास (अमांत)
- माघ
- मास (पूर्णिमांत)
- माघ
- विक्रम संवत
- 2082
- शक संवत
- 1947
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पंचांग क्या है
पंचांग के पाँच अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के 12 अंश के अंतर से बनती है, इसलिए एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं। नक्षत्र चंद्रमा की स्थिति से, और योग सूर्य-चंद्र के जोड़ से निकलता है।
पंचांग सूर्योदय पर आधारित है, इसलिए हर शहर का पंचांग थोड़ा अलग होता है: तिथि का अंत एक ही क्षण पर होता है, पर सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के अनुसार बदलते हैं।
यहाँ हर मान स्विस एफेमेरिस और लाहिरी अयनांश से गणना किया गया है, अनुमान से नहीं।
आज लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सोमवार, 26 जनवरी 2026 को लखनऊ में: शुक्ल अष्टमी 09:18 PM तक, फिर शुक्ल नवमी 07:05 PM (अगले दिन) तक।
आज लखनऊ में राहु काल कब है?
सोमवार, 26 जनवरी 2026 को लखनऊ में राहु काल 08:15 AM – 09:36 AM है। राहु काल दिन के आठ भागों में से एक है; परंपरा में इसमें नया काम शुरू नहीं किया जाता।
आज का नक्षत्र कौन सा है?
अश्विनी 12:33 PM तक, फिर भरणी 11:09 AM (अगले दिन) तक।
आज लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय 06:53 AM, सूर्यास्त 05:43 PM।
क्या हर शहर का पंचांग एक जैसा होता है?
नहीं। तिथि और नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण पर बदलते हैं, पर सूर्योदय, राहु काल और शुभ मुहूर्त शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर हैं।
दूसरे शहरों का पंचांग
लखनऊ के व्रत और त्योहारयह पंचांग अपनी वेबसाइट पर लगाएँ
समय लखनऊ के स्थानीय समय में। सूर्योदय सूर्य के ऊपरी किनारे से, अपवर्तन सहित; तिथि और करण चंद्र-सूर्य के अंतर से; नक्षत्र और योग लाहिरी अयनांश से। स्थानीय परंपरा के अनुसार व्रत-त्योहार एक दिन आगे-पीछे हो सकते हैं। गणना कैसे होती है